समृद्धि, दीपावली, धनतेरस

लक्ष्मी पूजा

लक्ष्मी पूजा समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा है, जो दीपावली, धनतेरस या शुक्रवार को घर पर लगभग 1.5–2 घंटे में सम्पन्न होती है।

WhatsApp पर इस पूजा की बात करें

WhatsApp में संदेश तैयार खुलेगा। अपना शहर और तारीख़ जोड़कर भेजें — पंडितजी, मुहूर्त और खर्च हम पहले आपके साथ तय करते हैं।

अवधि
1.5–2 घंटे
सामग्री
हम व्यवस्था कर सकते हैं, या आप ख़ुद ला सकते हैं
स्थान
आम तौर पर आपके घर पर
खर्च
WhatsApp पर तय

महत्व

देवी लक्ष्मी को समृद्धि, वैभव और कल्याण की दात्री माना जाता है। उनकी पूजा विशेषकर दीपावली की संध्या को प्रदोष काल में भगवान गणेश के साथ की जाती है, तथा धनतेरस, शुक्रवार और कई क्षेत्रों में शरद पूर्णिमा पर भी। व्यापारी परंपरागत रूप से दीपावली पूजा में चोपड़ा पूजन, अर्थात नए बही-खातों का पूजन, शामिल करते हैं।

विधि

यह सामान्य क्रम है; परिवार की परंपरा के अनुसार पंडितजी से विधि तय करें।

  1. संकल्प और गणेश पूजा

  2. कलश स्थापना

  3. लक्ष्मी आवाहन और षोडशोपचार पूजा

  4. श्री सूक्त और लक्ष्मी मंत्रों का पाठ

  5. परंपरा अनुसार कुबेर पूजा और चोपड़ा पूजन

  6. दीप प्रज्वलन, आरती और प्रसाद

सामग्री

नीचे दी गई सामग्री की व्यवस्था हम कर सकते हैं, या परिवार ख़ुद ला सकता है। WhatsApp पर तय करें कि कौन-सी चीज़ें हम लाएँगे और कौन-सी आप तैयार रखेंगे।

  • लाल वस्त्र की चौकी पर लक्ष्मी–गणेश मूर्ति या चित्र
  • कमल और लाल पुष्प
  • नैवेद्य के लिए खील, बताशे और मिठाई
  • कलश, सिक्के और चोपड़ा पूजन के लिए नए बही-खाते
  • मिट्टी के दीये, घी या तेल, और कुमकुम

पूजा से पहले, ये बातें तय करें

बातचीत में ये विवरण साझा करने से आपके परिवार के लिए व्यवस्था स्पष्ट होगी।

  • पूजा दीपावली, धनतेरस या किसी और दिन के लिए है, यह बताएँ ताकि मुहूर्त पर बात हो सके।
  • पूजन के लिए बही-खाते, तिजोरी या व्यापार की वस्तुएँ रखी जाएँगी या नहीं, यह तय करें।
  • नैवेद्य कौन बनाएगा और शाम के दीयों की व्यवस्था कौन करेगा, यह पहले तय करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लक्ष्मी पूजा क्या है?

देवी लक्ष्मी की पूजा, जो प्रायः भगवान गणेश के साथ, समृद्धि और परिवार के कल्याण के लिए घर पर की जाती है।

दीपावली पर लक्ष्मी पूजा कब की जाती है?

दीपावली की संध्या को, परंपरागत रूप से सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में। सटीक मुहूर्त वर्ष और शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए WhatsApp पर पक्का कर लें।

क्या यह अन्य दिनों में भी हो सकती है?

हाँ। परिवार इसे धनतेरस, शुक्रवार, कई क्षेत्रों में शरद पूर्णिमा पर, तथा नए व्यापार के आरंभ पर भी करते हैं।

चोपड़ा पूजन क्या है?

नए बही-खातों का पूजन, जो व्यापारी परंपरागत रूप से दीपावली की लक्ष्मी पूजा में नए लेखा-वर्ष के शुभारंभ के लिए करते हैं।

इसमें कितना समय लगता है?

गणेश पूजा, श्री सूक्त और आरती सहित लगभग 1.5–2 घंटे।

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